उम्मीद
मेरी जिंदगी के इतने साल
यूँ हीं निकल गए ,
पन्ने पलटते - पलटते
आया न हाथ कुछ भी
बस रह गया आते - आते।
सबकी सुनी मैंने
पर अपनी कभी न सुनी
जो भी दिल में था
वो कभी बयां न कर पाया ,
जो भी मैंने चाहा
आज तक न पाया।
भटक रहा हूं
जिंदगी की राहों में
तलाश है मुझे
मेरे मंजिल की ,
बस उम्मीद है इतनी सी
पा लूंगा एक दिन उसे भी।
© Tukbook

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