आज फिर तेरी याद आयी
यादों के सागर में डूबते - उतराते
बरसात के मौसम में
हँसते कभी गाते ,
तन्हाई में अकेलपन में जब मैं
खोया यादों के उपवन में
हमेशा मुझे तेरी याद आयी
तब मुझे ये अहसास हुआ
कितनी दुखदाई है ये तन्हाई।
तुमसे मिलने की उम्मीद में
भटक रहा हूँ तेरी यादों के साये में
तुम्हारा वो चाँद सा खूबसूरत चेहरा
जब से बसा है मेरे जेहन में
तुम हीं तुम समायी हो मेरे कण - कण में।
तेरे इंतजार में बैठा हूँ पलकें बिछाए
मिलोगी तुम मुझे एक दिन कहीं इत्तेफाक से
उस दिन मेरा मन खुशियों से
उमंग से भर जायेगा
तुमसे मिलने की ख़ुशी में।
तेरी याद में खोया - खोया सा रहता हूँ
सपनों में भी भी तुमको हीं देखा करता हूँ।
© Tukbook

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