नन्ही सी जान
कल रात मेरे सपने में
आयी एक नन्ही परी
प्यारी अजन्मी एक नन्ही सी जान
डरी , सहमी और कुछ परेशान
बोली - सुना है .................
बड़े भाग्य से
मिलती है मानव योनि
फिर क्यों हो रही
मेरे साथ ये अनहोनी।
क्यों मायें हो गयी हैं निर्मम
क्या सृष्टि होने वाली खतम
सुनती रही मैं चुपचाप ................
उस प्यारी अजन्मी की बात ........
फिर मैं बोली ..........................
सुन मेरी प्यारी , नन्ही
और भोली - भाली सी जान
तेरी है एक नयी
और अच्छी सी पहचान
सुन प्यारी ऐसा कुछ नहीं है
हर माँ - बाप एक जैसे नहीं हैं।
तू आ ..............................
मेरे घर आ ......................
जियेगी हंसी और खुशी से
ये मेरा वादा रहा .............
© Tukbook
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
पूरा पढ़ लिया आपने ? हमें बताएं कि यह आपको कैसा लगा ?