दोस्ती का असर

दोस्ती का असर 
selective focus photography of man and woman holding there hands


एक दोस्त का असर
मुझपे कुछ ऐसा छाया 
बैठी रही मैं गुमसुम 
फिर भी उसने दुनिया दिखाया। 

एक दोस्त का असर मेरे जीवन पर 
कुछ ऐसा छाया 
मैं भूली अपने आप को हीं 
मगर उसने मुझको मुझसे मिलाया। 

जब-जब मेरी आँखों को 
उदास उसने पाया 
उसने खुद को भी 
मेरे गम में शामिल कराया। 

जब भी मैं हुई नासमझ जो
उसने मुझे हर बार समझाया 
मेरे हर सपने को पूरा करने का 
उसने ही तो मुझे हौसला दिलाया। 

मैं नादान और नटखट सी 
उसे तो मैंने खूब हँसाया 
उसे भी तो मेरी हर बात 
मेरी हर नादानी और शरारत पसंद आया। 

एक साथ पढ़े हम , साथ बढ़े 
बचपन से साथ भी खेले 
ऐसा दोस्त मिला मुझे जिसके होते 
मैं खुद को न पाऊं कभी अकेले। 

क्या खूब एक दोस्त का असर  
मेरे जीवन पर कुछ ऐसा छाया
क्या होती है सच्ची दोस्ती अब समझ आया 
मुझे भी उसने एक सच्चा दोस्त बनाया। 

© Tukbook

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