आत्मनिर्भर बन
अपनी जिंदगी की किताब
तू खुद हीं लिख
लिख तू अपने हिस्से के सुख-दुःख
न कर तू खुदा की मर्ज़ी का इंतज़ार
समय आ गया है अब
तू आत्मनिर्भर बन।
अपने हिस्से के कर्म
तू करता चल
बोझ अपने जीवन के
तू खुद हीं उठा
न कर तू किसी और के
मदद की आस
समय आ गया है अब
तू आत्मनिर्भर बन।
न आएगा कोई भी
तेरी मदद की खातिर
करेगा न कोई तेरा भला
बढ़ा आगे वही
जो है अकेला चला
समय आ गया है अब
तू आत्मनिर्भर बन।
अपने हिस्से की रोटी
तू खुद ही कमा
तिनका-तिनका कर
तू अपना घर बना
न देगा कोई भी तेरा साथ
समय आ गया है अब
तू आत्मनिर्भर बन।
© Tukbook
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
पूरा पढ़ लिया आपने ? हमें बताएं कि यह आपको कैसा लगा ?