तू और मैं

तू और मैं 


अस्पताल में तेरी किलकारी थी गूंजी
मै घर पर ही चिल्लाया था
पापा ने गोद में उठा के पुचकारा था तुम्हें
मुझे तो बगल की आई ने दुलारा था। 
 
साइकिल, पहिया, वो मंहगे खिलौने 
शायद उनसे चलना सीखा है तुमने
मै तो गिरते-पड़ते सीखा है खड़ा होना
मुझे तो चलना सड़कों ने सिखाया था। 

नींद खुला करती थी तुम्हारी अलार्म से
मुझे तो हर बार चिड़ियों ने जगाया था
ताकत के लिए पिए होगे बहुत सी घुट्टी
मां के मालिश ने मुझे फौलाद बनाया था। 

दूध पापड़ी बिस्कुट से सीखा है खाना तुमने
मेरी मैया ने मुझे रोटी-साग ही खिलाया था
तेरे नामी स्कूल में भर्ती थी पढ़ने को
ककहरा मुझे आंगनवाड़ी ने सिखाया था। 

वो रंगीन लिबास  खाने की टिफिन तेरी
वो माली ने हर रोज गाड़ी में बिठाया था
वो बस्ते के लिए मां से मेरी जिद
आखिरकार पुरानी पैंट का बस्ता सिलाया था। 

ऊंची बिल्डिंग एसी कमरे डिजिटल ब्लैकबोर्ड
एनिमेटेड वीडियो से तुमको पढ़ाया था
नीम के पेड़ के नीचे की पढ़ाई
गुरु जी ने पिट-पिट कर गिनती सिखाया था। 

बड़े बड़े प्रोजेक्ट तेरे विज्ञान वाले प्रयोगों के
शहर के अखबार में नाम तेरा आया था
मै अबोध सरकारी स्कूल का
हस्तकला में ही बस हुनर दिखा पाया था। 

10 सीजीपीए दसवीं में तेरी 12वी में चौथा स्थान
शहर के बड़े कॉलेज में नाम तूने लिखवाया था
पर लालटेन की टिमटिमाती रोशनी में पढ़
मैंने गाँव का मान बढ़ाया था। 

तुम करो पढ़ाई बंगलौर में
गूगल ने जॉब दिलाया था
अब शुरू हुई मेरी जद्दोजहद
सरकार ने ठेंगा दिखाया था। 

भागा मै नंगे पाव फिर
सेना की होनी भर्ती थी
छोड़ पढ़ाई अब जा तू कमाने
हालातों ने बतलाया था। 

पर मलाल नहीं इस जिंदगी की 
हर वक़्त ने सबक सिखाया था
तुझे याद नहीं तेरे घरवाले भी
आते वक़्त मैंने सबको रुलाया था। 

तुझे भूल गए सब यार दोस्त भी
जिन्हे बाइक पर तुमने घुमाया था
बुला रही मुझे वो झूला भी
जिस पर यारों को झुलाया था। 

हूँ बीहड़ में जहां कोई नहीं 
पर भला मैंने किसे भुलाया था
तुम जाओ अमरीका, वियतनाम पर
मैं तो मिट्टी की खातिर आया था। 

ये थी कहानी उस शख्स की
जो उठ धरती की धुली से
रग-रग में बसा हो वतन और देश
जो अपना सब कुछ लुटाया था।!

© Tukbook

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