प्रकृति की बात कोरोना के साथ

प्रकृति की बात  कोरोना के साथ 

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कोरोना तुम बड़ी प्यारी हो, 
सारे बीमारियों से न्यारी हो, 

बिलकुल समझ में ना आती हो,
लोगो को तुम खूब डराती हो...

कोरोना तुम बड़ी प्यारी हो, 

तुमने नाम  बड़ा कमाया है , 
हाइजीन सबको सिखाया है ... 

बहुत सारी जानें तुमने ले डाली, 
बड़ी सीखें तुमने दे डाली, 

तुम्हारे नाम से लोग डर जाते हैं ,
घरों के अंदर छुप जाते हैं...

क्या सोच के तुम यूँ आयी हो, 
बर्बादी सभी का लायी हो,

जिसने नियमो को तोड़ा है, 
तूने उन्हें कहीं का न छोड़ा है.... 

जो घर के अंदर छुपे रहे, 
तुम्हारी नजरों से बचे रहे, 

निकली तुम बड़ी करामाती, 
ना धर्म देखा ना जाती,

तुम्हारा खेल सबसे निराला है, 
पूरा खानदान एक कर डाला है,

क्या हिन्दू और क्या मुसलमान, 
तुम सब के घर के हो मेहमान... 

अमेरिका तक को धो डाला है, 
तुम्हारा हीं तो बोल-बाला है...

तुमने कोहराम मचाया है,  
मानवता को समझाया है, 

कोरोना तुम बड़ी प्यारी हो, 
सारे बीमारयों से न्यारी हो...
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     अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़
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