किसी मोड़ पर शायद

किसी मोड़ पर शायद

Tukbook

 कभी किसी मोड़ पर शायद🤔
हम कभी मिल सकें मगर शायद🤔

जान पहचान से ही क्या होगा
फिर भी ऐ दोस्त ग़ौर कर शायद🤔

अजनबीयत की धुंध छंट जाए
चमक उठे तेरी नज़र शायद🤔

जिंदगी भर आंसू रुलाएगी
यादे -याराने-बेख़बर शायद🤔

जो भी बिछड़े हैं कब मिले हैं "एज़ाज़"
फिर भी तू इन्तज़ार कर शायद🤔
अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़ 
© Tukbook

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