दिल-ऐ-थकन
ऐेेै दिल अपनी थकन की कोई सफाई ना दे,
उसकी आवाज, उसकी मुस्कान
उसका खूबसूरत सा चेहरा, अब
ख्वाब में भी सुनाई व दिखाई ना दे...
बहुत सताते हैं वो रिश्ते जो टूट जाते हैं,
खुदा किसी को तौफ़ीके आशिकनाइ ना दे,
मैं सारी उम्र अंधेरों मे काट सकता हूँ,
पर रौशनी पराई ना दे,
और अगर यही तेरी दुनिया का हाल है मालिक,
तो मेरी कैद भली है, मुझे रिहाई ना दे,
सपनों में भी होता अपने गुनाहों का अहसास
मुझे मेरी वजूद को इतनी भी रुसवाई ना दे,
और दुआ ये मांगी है सहमे हुए एज़ाज़-ऐ-हिन्द ने,
की अब मेरी सोच को ख्याल-ऐ-नापाकी ना दे,
अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़
© Tukbook
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