थक गया है सफर
थक गया है मुसलसल सफ़र उदासी का,
और अब भी है मेरे दिल मे चुभन उदासी का,
वो कौन-सी बात थी जो की बिखेर गया,
तेरे गुलाब से चेहरे पे ज़र उदासी का,
मेरे वजूद के हिस्सों मे कोई तो था,
जो रख गया है दिया दिल पर उदासी का,
मैं तुझसे कैसे कहूँ यार-ए-मेहरबां मेरे,
की तू हीं इलाज़ है मेरी हर उदासी का,
ये अब जो आग का दरिया मेरे वजूद में है,
यही तो पहले-पहल था वजह उदासी का,
ना जाने आज कहाँ खो गया सितार-ए-शाम,
वो मेरा दोस्त, मेरा हमसफ़र उदासी का,
‘एज़ाज़ ’ दीदार-ए-ख्वाब में ना ढूंढ उसे,
वो दिल की तह में कहीं है गोहर उदासी का,
अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़
© Tukbook

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