समाज की सच्चाई


 

कभी किसी को सोच से 

ज्यादा कुछ नहीं मिलता, 

कहीं प्यार तो कहीं 

अच्छा व्यवहार नहीं मिलता, 

 

हर घर मे दुःख, तकलीफ, 

कलह, स्वार्थ के ही कारण है, 

जहाँ उमीद और विश्वास हो वहाँ 

स्वार्थ  जैसी बीमारी नहीं मिलती, 


कहाँ सर छुपाये कहाँ दिल की बात रखें, 

घर तो मिलता है लेकिन इंसान नहीं मिलता, 


ये क्या अज़ब है की सब अपने आप में गुम हैं, 

ज़बाँ मिली है मगर हम-ज़बाँ नहीं मिलता, 


चिराग़ जलते ही घर के अंधकार मिट जाते  हैं

मगर ख़ुद के दिलों मे कभी प्रकाश नहीं मिलता,...

© Tukbook

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